निपात और उसके कार्य – Nipat Aur Uske Karya – हिंदी में निपात के कार्य ?

निपात और उसके कार्य – Nipat Aur Uske Karya – हिंदी में निपात के कार्य ?

निपात और उसके कार्य – Nipat Aur Uske Karya – हिंदी में निपात के कार्य ?  Hindi Grammar, Types of Nipat in Hindi. Nipat (Particle)-निपात – Hindi Grammar.

Nipat (Particle)-निपात - Hindi Grammar

            

निपात और उसके कार्य

निपात किसे कहते हैं ?

यास्क के अनुसार ‘निपात’ शब्द के अनेक अर्थ हैं, इसीलिए ये निपात कहे जाते हैं— उच्चावच्चेषु अर्थेषु निपततीति निपाताः (नि० १/२) । यह पाद का पूरण करनेवाला होता है—’निपाता पादपूरणाः ।

कभी-कभी अर्थ के अनुसार प्रयुक्त होने से अर्थ निपातों से अन्य सार्थक निपात भी होते हैं। निपात का कोई लिंग, वचन नहीं होता । मूलतः इसका प्रयोग अव्ययों के लिए होता है। जैसे अव्ययों में आकारगत अपरिवर्तनीयता होती है, वैसे ही निपातों में भी ।

यास्क ने निपात के तीन भेद माने हैं—१. उपमार्थक निपात, यथा – इव, न, चित नु; २. कर्मोपसंग्रहार्थक निपात, यथा—न, आ, वा, ह; ३. पदपूरणार्थक निपात, यथा – नूनम् खलु, हि, अथ । यद्यपि निपातों में सार्थकता नहीं होती तथापि उन्हें सर्वथा निरर्थक भी नहीं कहा जा सकता।

निपात शुद्ध अव्यय नहीं है; क्योंकि संज्ञाओं, विशेषणों, सर्वनामों आदि में जब अव्ययों का प्रयोग होता है, तब उनका अपना अर्थ होता है, पर निपातों में ऐसा नहीं होता । निपातों का प्रयोग निश्चित शब्द, शब्द- समुदाय या पूरे वाक्य को अन्य भावार्थ प्रदान करने के लिए होता है।

इसके अतिरिक्त, निपात सहायक शब्द होते हुए भी वाक्य के अंग नहीं हैं। पर, वाक्य में इनके प्रयोग से उस वाक्य का समग्र अर्थ व्यक्त होता है। ? साधारणतः निपात अव्यय ही है। हिंदी में अधिकतर निपात शब्दसमूह के बाद आते हैं, जिनको वे बल प्रदान करते हैं।

निपात के कार्य

निपात के निम्नांकित कार्य होते हैं-

१. प्रश्नबोधक — क्या वह जा रहा है ?

२. अस्वीकृतिबोधक – मेरा छोटा भाई आज वहाँ नहीं जाएगा।

३. विस्मयादिबोधक— क्या! अच्छी पुस्तक है।

४. वाक्य में किसी शब्द पर बल देना- बच्चा भी जानता है।

निपात के प्रकार

निपात के नौ प्रकार या वर्ग हैं-

१. स्वीकार्य निपात— हाँ, जी, जी हाँ

२. नकारार्थक निपात – नहीं, जी नहीं

३. निषेधात्मक निपात—मत

४. प्रश्नबोधक निपात — क्या ? न

५. विस्मयादिबोधक निपात—क्या, काश, काश कि

६. बलदायक या सीमाबोधक निपात—तो, ही, तक, पर, सिर्फ, केवल

७. तुलनाबोधक निपात-सा

८. अवधारणबोधक निपात-ठीक, लगभग, करीब, तकरीबन

९. आदरबोधक निपात—जी

७. अव्यय का पद- परिचय

इसमें अव्यय, अव्यय का भेद और उससे संबंध रखनेवाला पद— इतनी बातें लिखनी चाहिए।

उदाहरण – वह अभी आया है।

इसमें ‘अभी’ अव्यय है। इसका पदान्वय होगा-

अभी— कालवाचक अव्यय, ‘आना’ क्रिया का काल सूचित करता है, अतः, ‘आना’ क्रिया का विशेषण है।

उदाहरण – अहा! आप आ गए। अहा- हर्षबोधक अव्यय है।

क्रियाविशेषण का पद- परिचय

इसके अंतर्गत क्रियाविशेषण का प्रकार और जिस क्रिया की यह विशेषता प्रकट करे उस पद का उल्लेख होना चाहिए।

उदाहरण – बालक अपने क्लास में शांतिपूर्वक बैठता है।

शांतिपूर्वक — रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘बैठता है’ क्रिया की विशेषता बतलाता है।

पद – परिचय के कुछ अन्य उदाहरण

उदाहरण १. अच्छा लड़का कक्षा में शांतिपूर्वक बैठता है।

अच्छा – गुणवाचक विशेषण, पुंलिंग, एकवचन, इसका विशेष्य ‘लड़का’ है।

लड़का–जातिवाचक संज्ञा, पुंलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष, कर्ताकारक, ‘बैठता है’ क्रिया का कर्ता है।

कक्षा में – जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, अधिकरणकारक है।

शांतिपूर्वक — रीतिवाचक क्रियाविशेषण, ‘बैठता है’ क्रिया का विशेषण |

बैठता है – अकर्मक क्रिया, कर्तृवाच्य, सामान्य वर्तमानकाल, पुंलिंग, एकवचन, अन्यपुरुष, इसका कर्ता लड़का है।

उदाहरण २. मोहन अपने भाई सोहन को छड़ी से मारता है।

मोहन — व्यक्तिवाचक संज्ञा, अन्यपुरुष, पुंलिंग, एकवचन, कर्ताकारक, इसकी क्रिया है ‘मारता है’।

अपने — निजवाचक सर्वनाम, पुंलिंग, एकवचन, संबंधकारक ‘भाई’ से संबंध रखता है, सार्वनामिक विशेषण, इसका विशेष्य ‘भाई’ है।

भाई – जातिवाचक संज्ञा, पुंलिंग, एकवचन, कर्मकारक, ‘सोहन’ (कर्म) का विशेषण, ‘मारता है’ क्रिया का कर्म है।

सोहन को – व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुंलिंग, एकवचन, कर्मकारक, ‘भाई’ के अर्थ को प्रकट करता है, अतः ‘समानाधिकरण संज्ञा’ है।

छड़ी से—– जातिवाचक संज्ञा स्त्रीलिंग, एकवचन, करणकारक है।

मारता है— सकर्मक क्रिया, इसका कर्म ‘भाई सोहन, सामान्य वर्तमानकाल, पुंलिंग, कर्तृवाच्य, अन्यपुरुष, इसका कर्ता ‘मोहन’ है।

 

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