UP Board and NCERT Solution of Class 10 Science Chapter- 5 Life Processes ( जैव प्रक्रम ) Notes in hindi

UP Board and NCERT Solution of Class 10 Science [विज्ञान] ईकाई 2 जैव जगत – Chapter- 5 Life Processes ( जैव प्रक्रम) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रिय पाठक! इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको कक्षा 10वीं विज्ञान ईकाई 2  जैव जगत (Organic world) के अंतर्गत चैप्टर 5 ( जैव प्रक्रम)  पाठ के अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं लघु उत्तरीय प्रश्न  प्रदान कर रहे हैं। UP Board आधारित प्रश्न हैं। आशा करते हैं हमारी मेहनत की क़द्र करते हुए इसे अपने मित्रों में शेयर जरुर करेंगे।

पोषण, प्रकाश संश्लेषण, मनुष्य का पाचन तन्त्र, श्वसन, परिवहन, वाष्पोत्सर्ज, मानव में उत्सर्जी तन्त्र

Class  10th  Subject  Science (Vigyan)
Pattern  NCERT  Chapter-  Life Processes

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न / लघु उत्तरीय प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. जटिल जैव पदाथों के अंतःग्रहण, उसके पाचन एवं अवशोषण को हम पोषण की कौन-सी विधि कहते हैं?

उत्तर- प्राणिसमभोजी पोषण।

प्रश्न 2. स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सी- जनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है?

उत्तर- पक्षी तथा स्तनधारी सरीखे जंतुओं को अपने शरीर का तापक्रम बनाए रखने के लिए निरंतर ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः इनमें उच्च दक्षतापूर्वक ऑक्सीजन की पूर्ति आवश्यक है। यह तभी संभव है जब ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने से रोका जाए।

प्रश्न 3. श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?

उत्तर- स्थलीय जीव वायुमंडल की ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। जो जीव जल में रहते हैं वे जल में विलेय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। चूँकि जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है अतः स्थलीय जीव इस मामले में लाभ की स्थिति में हैं।

प्रश्न 4. पादपों की उस प्रक्रिया का नाम लिखिए, जिसमें जल वाष्प के रूप में लुप्त होता है?

उत्तर- वाष्पोत्सर्जन ।

प्रश्न 5. हमारी आँत में वसा का पाचन कहाँ होता है?

उत्तर- छोटी आंत में।

प्रश्न 6. यदि किसी पादप का जाइलम हटा दिया जाए तो पादप का क्या होगा?

उत्तर- जल तथा लवण ऊपर की ओर प्रवाहित नहीं होगा तथा कुछ समय पश्चात् वह पादप मृत हो जाएगा।

प्रश्न 7. कार्बोहाइड्रेट के पाचन से प्राप्त अन्तिम उत्पाद का नाम बताइए।

उत्तर- ग्लूकोस।

प्रश्न 8. स्वपोषी तथा विषमपोषी पोषण विधियों में कोई एक अन्तर लिखिए।

उत्तर- स्वपोषी पोषण हरे पौधों तथा साइनोबैक्टीरिया में होते हैं। विषमपोषी पोषण प्रायः सभी जन्तुओं, मानव, परजीवी, कवक आदि में होते हैं।

प्रश्न 9. लार में कौन-सा एन्जाइम पाया जाता है?

उत्तर- टायलिन एन्जाइम जो स्टार्च का पाचन करता है।

प्रश्न 10. अग्न्याशय रस में उपस्थित दो एन्जाइम्स के नाम लिखिए

उत्तर- ट्रिप्सिन तथा काइमोट्रिप्सिन

प्रश्न 11. फुफ्फुसीय धमनी में किस प्रकार का रुधिर पाया जाता है?

उत्तर- अशुद्ध रक्त।

प्रश्न 12. मनुष्य के सहायक उत्पजी अंगों के नाम लिखिए।

उत्तर- यकृत, फेफड़े, त्वचा, आहारनाल

प्रश्न 13. हीमोग्लोबिन कहाँ पाया जाता है? इसका मुख्य कार्य बताइए।

उत्तर- हीमोग्लोबिन लाल रथिराणुओं में पाया जाता है। यह O2 परिवहन का कार्य करता है।

प्रश्न 14. कौन-सी त्वचीय ग्रन्धि स्तन ग्रन्थि के रूप में परिवर्धित होती है?

उत्तर- स्वेद अन्यि।

प्रश्न 15. परिवहन या संवहन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- शरीर में भोज्य पदार्थ, उत्सवीं पदार्थ, कार्बन डाइऑक्साइड, जल आदि को आवश्यकतानुसार एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की किया परिवहन या संवहन कहलाती है।

प्रश्न 16. पौधे में भोज्य पदार्थ का स्थानान्तरण (वितरण) करने वाले भाग का नाम लिखिए।

उत्तर- फ्लोएम ऊतक।

प्रश्न 17. मानव नर के एक घन मिमी रुधिर में कितनी लाल रुधिर कणिकाएँ होती हैं?

उत्तर- पुरुष के एक पन मिमी रक्त में औसतन 54 लाख लाल रुचिर कणिकाएँ होती हैं। इनका व्यास लगभग 8u होता है।

प्रश्न 18. हिल का विज्ञान के क्षेत्र में योगदान पर दिप्पणी लिखिए।

उत्तर- रॉबर्ट हिल-रॉबर्ट हिल ने प्रकाश अभिक्रियाओं (Light reactions) का पत्ता लगाया और बताया कि ये क्रियाएँ हरित लवक के ग्रेना में प्रकाश की उपस्थिति में होती हैं।

प्रश्न 19. सौर ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन किस क्रिया द्वारा होता है?

उत्तर प्रकाश संश्लेषण क्रिया में सौर ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदलकर कार्बनिक भोज्य पदायों में संचित हो जाती है।

प्रश्न 20. ATP तथा NADP का पूरा नाम लिखिए।

उत्तर- ATP: एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine triphosphate)।

NADP  : निकोटिनामाइड एडीनीन डाइन्यूक्लीओटाइड फॉस्फेट (Nicotinamide adenine dinucleotide phosphate)

प्रश्न 21. रुधिर दाथ किसे कहते हैं?

उत्तर हदय रक्त को धमनियों में पंप करता है रक्त धमनियों की भित्ति पर दबाव डालता है। इसे रुधिर दाब या रक्तदाब कहते हैं। रक्त दाब को दो अवस्थाओं में नापते हैं प्रकुंचन दाब (systolic) 120 mm Hg तथा अनुशिथिलन दाब (diastolic) 80 mm Hg होता है।

प्रश्न 22. रुधिर में एन्दीजन एवं एन्टीबॉडी कहाँ पाये जाते हैं?

उत्तर- रुधिर में प्रतिजन (antigen) लाल रुधिराणुओं की सतह पर स्थित होती है और प्रतिरक्षी (antibodies) रक्त प्लाज्मा में पायी जाती है।

प्रश्न 23. तालाब में जहाँ जलीय पौधे अधिक होते हैं, जाल की सतह पर बुलबुले उठते दिखाई देते हैं. क्यों?

उत्तर- जलीय पादपों में दिन के समय प्रकाश-सालेषण के फलस्वरूप मुक्त ऑक्सीजन जल की सतह पर बुलबुलों के रूप में निकलती प्रतीत होती है। प्रकाश-संश्लेषण एक जैव रासायनिक क्रिया है। इसमें जल का ऑक्सीकरण तथा कार्बन डाइऑक्साइड का अपचयन होता है। इसके फलस्वरूप शर्करा बनती है और ऑक्सीजन सहउत्पाद के रूप में मुक्त होती है।

प्रश्न 24. रक्त परिवहन से आप क्या समझाते हैं? यह कितने प्रकार

का होता है?

अथवा  रुधिर परिवहन को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- रक्त परिसंचरण तंत्र द्वारा पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाना रक्त परिवहन कहलाता है। यह दो प्रकार का होता है-(i) खुला रक्त परिवहन, तथा (ii) बन्द रक्त परिवहन।

प्रश्न 25. हीमोग्लोबिन कहाँ पाया जाता है? इसका मुख्य कार्य बताइए।

अथवा हीमोग्लोबिन से आपका क्या आशय है? रुधिर परिसंचरण में इसकी भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर- हीमोग्लोबिन एक जटिल प्रोटीन है जो लाल रुधिराणुओं में पाया जाता है। यह O2 परिवहन में सहायक होता है। थोड़ी मात्रा में CO₂ का परिवहन भी करता है।

प्रश्न 26. वह कौन-सी कार्यिकी क्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधों की वायवीय सतह से पानी का वाच्यीकरण होता है?

उत्तर-वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)।

प्रश्न 27. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं? उनके अन्तिम उत्पाद क्या है?

उत्तर- स्वयं पोषी या स्वपोषी पोषण के लिए CO₂, H₂O, सूर्य का प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति आवश्यक है। इस पोषण में इन पदार्थों से ग्लुकोस का निर्माण होता है। इस क्रिया के अंतिम उत्पाद कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि हैं।

प्रश्न 28. रन्ध क्या हैं? इनकी उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।

अथवा वातरन्ध (Stomata) क्या हैं? ये कहाँ पाए जाते हैं? इनकी क्या उपयोगिता है?

उत्तर- रन्ध्र पत्तियों की सतह पर पायी जाने वाली संरचनाएँ होती हैं जो कि वृक्काकार द्वार कोशिकाओं (Guard cells) द्वारा घिरी रहती हैं। रन्ध्र गैसीय विनिमय तथा वाष्पोत्सर्जन में भाग लेते हैं।

प्रश्न 29. ग्लूकोस अणु के ऑक्सीकरण से ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में यीस्ट से क्या उत्पाद चनते हैं?

उत्तर- ग्लूकोस अणु के ऑक्सीकरण से ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में एथिल ऐल्कोहॉल, कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रश्न 30. हमारे पाचन में आल की क्या भूमिका है? वर्णन कीजिए।

उत्तर- हमारे पाचन में आमाशय से सावित अम्ल निम्न भूमिकाओं का निर्वहन करता है-

(i) भोजन को तोड़कर उसके पाचन में सहायक होता है।

(ii) भोजन का माध्यम अम्लीय बनाता है।

(iii) भोजन के साथ आए हुए वीटाणुओं को नहता है।

प्रश्न 31. लार (Saliva) क्या है? इसकी उपयोगिता का वर्णन उदाहरण सहित दीजिए।

अथवा भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?

उत्तर- मुखगुहा में स्थित लार ग्रन्थियों से सावित तरत लार (Saliva) कहलाता है। इसमें पाचक एन्जाइम (टायलिन) पाया जाता है जो मुखगुहा में कार्बोहाइडेट (स्टार्थ) का पाचन प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 32. श्वसन को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- श्वसन ऐसी ऑक्सीकरण (Oxidation) क्रिया है जिसमें जीव कोशिकाओं में जटिल कार्बनिक पदार्थों का विघटन होने से कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल का उत्पादन होता है और जैव क्रियाओं को सम्पन्न कराने हेतु ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 33 . लार में कौन-सा एन्जाइम पाया जाता है और वह किसका पाचन करता है।

उत्तर- लार में टायलिन (एमाइलेज) एन्जाइम पाया आता है जो कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) का पाचन करता है।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. पादप किस प्रकार खाद्य प्राप्त करते हैं? प्रकाश-संश्लेषण के कौन-कौन से चरण हैं?

अथवा प्रकाश संश्लेषण के प्रक्रम के दौरान घटित होने वाली तीन घटनाओं की सूची बनाइए। इस प्रक्रम में रन्ध्रों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना खाद्य (भोजन) पदार्थ स्वयं तैयार कर लेते हैं।

प्रकाश-संश्लेषण (photosynthesis) द्वारा हरे पौधे सरल अकार्बनिक पदार्थों (जल, CO₂) से प्रकाश तथा पर्णहरिम की उपस्थिति में अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं। इस प्रक्रिया में घटित होने वाली तीन प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं-

(i) पर्णहरिम (chlorophyll) प्रकाश ऊर्जा को ग्रहण करके ऊर्जान्वित हो जाता है।

(ii) जल का हाइड्रोजन (H+) तथा हाइड्रॉक्किल (OH) आयनों में अपघटन हो जाता है। ऑक्सीजन सहउत्पाद के रूप में मुक्त होती है।

(iii) CO2  के अपचयन से शर्करा का निर्माण, जिसमें प्रकाश ऊर्जा सौर ऊर्जा के रूप में शर्करा में संचित होती है।

प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के चरण (Steps of Photosynthesis)-  यह एक जटिल प्रक्रिया है। यह मुख्यतया दो चरणों में पूर्ण होती है

(i) प्रकाशीय अभिक्रिया (Light Reaction)- इसमें प्रकाश ऊर्जा की उपस्थिति में जल का विच्छेदन H तथा OH आयनों के रूप में हो जाता है। OH आयन परस्पर मिलकर जल तथा ऑक्सीजन बनाते हैं। मुक्त ऊर्जा ATP तवा NADP.2H में संचित हो जाती है। यह क्रिया हरितलवक के चैनम (granum) में होती है।                                                                                           (ii) (ii) अप्रकाशीय अभिक्रिया (Dark Reaction)-इन क्रियायों के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है। यह क्रिया हरितलवक के स्ट्रोमा में होती है। इसमें CO2  रिबुलोस बाइफॉस्फेट (RuBP) 2 से क्रिया करके कैल्विन-बेन्सन चक्र (Calvin-Benson Cycle) द्वारा कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करता है और रिबुलोस बाइफॉस्फेट का पुनः निर्माण होता है। रन्ध्रों द्वारा CO₂ तथा O₂ का आदान- प्रदान होता है।

प्रश्न 2. किसी कीट में श्वसन की विधि का चित्र सहित विवा दीजिए।

उत्तर- कीटों में श्वसन की क्रियाविधि (Mechanism of Respiration in Insects)- हीरी में श्वसन श्वास नलियों या (trachea) द्वारा होता है। ये पारदर्शी, शाखामय, चमकीली नलिकाएँ होती है। इनमें क्यूटिकल के छाले पाए जाते हैं। ये श्वास नलियों को पिचकने नहीं देते। श्वास नलिकाएँ (trachea) शरीर में एक जाल बना लेती हैं। इनका सम्बन्ध श्वास रन्ध्रीं (spiracles) से होता है। श्वास रनबों के द्वारा वातावरण से गैससे आदान-प्रदान होता है। श्वास नलिकाओं के अन्तिम छोर ट्रैकिओला (tracheoles) कहलाते हैं। ट्रैकिओल्स कोशिकाओं एवं उत्तकों के सोरे सम्पर्क में रहते हैं।

कीट देहभित्ति की पेशियों के सिकुड़ने-फैलने से उवरगुहा का आयतन घटता-बड़ता रहता है। शरीर के फूलने पर अन्तः श्वसन (inspiration) पिचकने पर निःश्वसन (expiration) होता है।

विश्रामावस्था में ट्रैकिओल्स में ऊतक तरल भर जाता है। अतः अतक तरल में घुलकर ऊतक कोशिकाओं में विसरित होती है। सक्रिय अवस्था में कोशिका की सान्द्रता बढ़ जाती है, उतक तरल कोशिकाओं में वापस पहुँच जाता है। अतः सीधे ही कोशिकाओं तक पहुँच जाती है। CO, हीमोलिम्फ में घुलकर विसरण द्वारा शरीर से बाहर निकल जाती है।

प्रश्न 3. रुधिर के चवका निर्माण की क्रियाविधि पर टिच्यशौ लिखिए।

अथवा  चोट लगने के बाद रुधिर का थक्का बनने के दौरान में क्रियाएँ होती हैं उन्हें क्रम में सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर- रुधिर का थक्का बनने की क्रियाविधि- रुधिर का स्कल्या या धक्का बनना एक जटिल प्रक्रिया होती है। होवेल (Howell) के अनुसार व्वत प्लाज्मा में एक बक्हारोधी (anticoagulant) हिपेरिन (heparin) पाया जाता है जो शरीर की रक्त वाहिनियों में रक्त का चक्का नहीं बनने देख चोट लगने पर रक्त प्लेटलेट्स (अन्य कशेरुकियों में तर्क कोशिकाएँ (spindle cella)) से प्लेटलेट तत्त्व-3 (platelet factor-3) मुक्त होता है। तथा प्लाज्मा प्रोटीन से क्रिया करके प्रोब्रोम्बिनेज (prothrombinase) विकर निर्माण करता है। क्षति उकास्न (thrombopla stin) मुक्त होता है।

प्रोब्रोम्बिनेज या ब्रोम्बोप्लास्टिन Ca++ तथा प्लाज्मा प्रोटीन की उपस्थिति निष्क्रिय प्रोनोम्बिन को सक्रिय ब्रोम्बिन (thrombin) में बदल देता है।

ब्रोम्बिन प्लाज्मा में उपस्थित घुलनशील फाइब्रिनोजन (fibrinogen) को ठोस फाइब्रिन (fibrin) तन्तुओं में बदल देता है। फाइब्रिन तन्तु चोटग्रस्त भाग पर एक जाल बना लेते हैं। इस जाल में रुधिर कणिकाएँ फैस जाती हैं और रुधिर का थक्का बन जाता है।

रक्त का थक्का बनने में लगभग 2 से 8 मिनट का समय लगता है। रक्त का बक्का क्षतिग्रस्त भाग से रुधिर के प्रवाह को रोक देता है। कुछ समय पश्चात् धक्के के सिकुड़ने से पीले रंग का तरल ‘सीरम’ (serum) रिसने लगता है। सीरम वास्तव में फाइब्रिनोजनरहित प्लाज्मा (plasma) होता है।

प्रश्न 4. धमनी तथा शिरा में अन्तर लिखिए।

उत्तर-                                                                    धमनी तथा शिरा में अन्तर

क्र.सं. धमनी शिरा
1 इनमें रुधिर हृदय से अंगों की ओर बहता है। इनमें रुधिर अंगों से हृदय की ओर बहता है।
2 हृदय स्पंदन के कारण इसमें रुधिर रुक-रुककर तथा अधिक दबाव के साथ बहता है। शिराओं में रुधिर के बहाव की गति धीमी व एक-सी रहती है।
3 इनकी दीवारे मोटी तथा लचीली होती हैं। इनकी दीवारें पतली व कम लचीली होती हैं।
4 इनकी गुहा सँकरी होती है। ये इनकी गुहा चौड़ी होती है।
5 ये खाली होने पर भी नहीं पिचकती हैं। खाली होने पर पिचक जाती हैं।
6 पल्मोनरी धमनी को छोड़कर सभी धमनियों में शुद्ध (ऑक्सी- जन युक्त) रुधिर होता है। पल्मोनरी शिरा को छोड़कर सभी शिराओं में अशुद्ध (ऑक्सीजन रहित) रुचिर होता है।

 

7 धमनियों में कपाट नहीं होते है। शिराओं में स्थान-स्थान पर कपाट होते हैं।
8 ये प्रायः त्वचा से दूर गहराई में स्थित होती हैं। ये प्रायः त्वचा के समीप स्थित होती हैं।

प्रश्न 5. मानव उत्सर्जन तंत्र का एक आरेख खीचिए। उस पर विम्नलिखित को नामांकित कीजिए- महाधमनी, महाशिरा, मूत्राशय तथा मूत्रमार्ग

उत्तर-

 

प्रश्न 6. जड़ों के जाइलम में जल क्यों और कैसे निरंतर प्रवेश करता है?

उत्तर- पौधे की जड़ों की कोशिकाएँ मृदा के सम्पर्क में रहती हैं, जिसके कारण वे सक्रिय रूप से आयन प्राप्त करते हैं। परिणामस्वरूप जड़ और मृदा के बीच आयन सांद्रण में एक अंतर उत्पन्न होता है, जिसे समाप्त करने के लिए जल लगातार जाइलम में जाता है और जल के स्तंभ का निर्माण करता है, जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है।

प्रश्न 7. इस कथन को स्पष्ट कीजिए-पित्त में कोई एन्जाइम नहीं होता, परन्तु यह पाचन क्रिया के लिए आवश्यक होता है।

उत्तर- क्योंकि पित्त लवण क्षुद्रांत्र (छोटी आँत) में मौजूद वसा की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है, जिससे एन्जाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। अन्यथा उस पर एन्जाइम का कार्य करना मुश्किल हो जाता है।

प्रश्न 8. द्वार कोशिकाएँ रंधी-छिद्रों के खुलने और बंद होने को कैसे नियंत्रित करती हैं?

उत्तर- द्वार कोशिकाओं में जैसे ही जल अंदर जाता है, तो वे फूल जाती हैं और रंध्र का छिद्र खुल जाता है। इसी तरह जब द्वार कोशिकाएँ सिकुड़ती हैं, तो छिद्र बंद हो जाता है।

प्रश्न 9. वृक्क के प्रमुख कार्य लिखिए।

उत्तर- वृक्क के कार्य-

(i) उत्सर्जी पदार्थों को शरीर से उत्सर्जित करते हैं।

(ii) रक्त की अम्लीयता/क्षारीयता (pH मान) को नियन्त्रित करते हैं।

(iii) शरीर के अन्तःवातावरण में जल सन्तुलन, लवण सन्तुलन को बनाये रखते हैं।

(iv) यह रक्तदाब को नियन्त्रित करने में सहायता करते हैं।

(v) अनेक बाह्य पदार्थों जैसे विषैले पदार्थ, औषधिर्या आदि को शरीर से बाहर निकालते हैं।

 

प्रश्न 10. मनुष्य में पाये जाने वाले दाँतों के प्रकार तथा उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- मनुष्य के दाँत मदन्ती (thecodont), विषमदन्ती (heterodont) तथा द्विबारदन्ती (diphyodont) होते हैं। मनुष्य में चार प्रकार के दाँत पाए जाते हैं-

(i) कृन्तक- ये काटने व कुतरने का कार्य करते हैं। प्रत्येक जबड़े में इनकी संख्या चार-चार होती है।

(ii) रदनक- ये भोजन को चीरने-फाड़ने का कार्य करते हैं। प्रत्येक जबड़े में इनकी संख्या दो-दो होती है।

(iii) प्रचर्वणक ये भोजन को चबाने का कार्य करते हैं। प्रत्येक जबड़े में इनकी सख्या चार-चार होती।

(iv) चर्वणक ये भोजन को पीसने का कार्य करते हैं। प्रत्येक जबड़े में इनकी संख्या छह-छह होती।

प्रश्न 11. पादपों में जल एवं खनिज तथा खाद्य उत्पादों के संवहन हेतु पायी जाने वाली वाहिकाओं का वर्णन कीजिए तथा उनके नाम बताइए।

उत्तर- पादपों में जल एवं खनिज तथा खाद्य उत्पादों का संवहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है। जाइलम का निर्माण वाहिनिकाओं, वाहिकाओं, काष्ठ रेशे तथा काष्ठ मृदूतक से होता है। वाहिनिकाओं तथा वाहिकाओं की कोशिका भित्ति के स्थूलित हो जाने के कारण ये कोशिकाएँ मृत हो जाती हैं।

पौधों में खाद्य उत्पादों का संवहन फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है। फ्लोएम का निर्माण चालनी नलिकाओं, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक तथा फ्लोएम रेशे से होता है। चालनी नलिकाएँ सजीव होती हैं।

प्रश्न 12. सन्तुलित आहार पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर- सन्तुलित आहार- जिस भोजन (आहार) से शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व उचित अनुपात में उपलब्ध हो जाते हैं, उस आहार को सन्तुलित आहार कहते हैं। सन्तुलित आहार से जैविक कार्यों के लिए आवश्यक ऊर्जा, शरीर की मरम्मत और वृद्धि के लिए प्रोटीन्स, खनिज तथा विटामिन्स आदि मिलते रहते हैं जिससे शरीर स्वस्थ बना रहता है।

प्रश्न 13. प्रकाश-संश्लेषण की उपयोगिता का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

उत्तर-   प्रकाश-संश्लेषण की उपयोगिता निम्नवत् है

(i) भोज्य पदार्थ का उत्पादन- हरे पौधे उत्पादक (producer) कहलाते हैं। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण क्रिया में कार्बनिक भोज्य पदार्थों (कार्बोहाइड्रेट्स) का निर्माण करते हैं। पृथ्वी के समस्त जन्तु (उपभोक्ता) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भोजन के लिए पौधों पर निर्भर रहते हैं।

(ii) वायुमण्डल का शुद्धीकरण प्रकाश संश्लेषण द्वारा वायुमण्डल में 0, तथा CO, की मात्रा का अनुपात सन्तुलित बना रहता है।

(iii) प्रकाश संश्लेषण क्रिया में अनेक कार्बनिक यौगिकों का निर्माण होता है जिनका उपयोग मनुष्य औषधियों तथा अन्य कार्यों के लिए करता है।

प्रश्न 14. मनुष्य में आन्तरिक परिवहन किस प्रकार होता है? संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर- प्राणियों में भोज्य पदार्थ, उत्सर्जी पदार्थ, O2 CO2 जल, हॉर्मोन्स आदि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना आन्तरिक परिवहन कहलाता है। यह कार्य मुख्यतः रक्त और लसिका द्वारा सम्पन होता है। शरीर में रक्त का परिवहन धमनियों, शिराओं तथा रक्त कोशिकाओं द्वारा होता है। धमनियाँ रक्त का वितरण करती है तथा शिराये रक्त को वापस हृदय की ओर लाती हैं। खा कोशिकाओं द्वारा धमनी तथा शिरायें आपस में जुड़ती हैं। पदार्थों का आदान-प्रदान रक्त कोशिकाओं और ऊतक तरल के मध्य होता रहता है।

प्रश्न 15. वाष्पोत्सर्जन तथा बिन्दुस्राव में अन्तर लिखिए। 

उत्तर-                                                                वाष्पोत्सर्जन तथा विन्दुस्राव में अन्तर

क्र.स. वाष्पोत्सर्जन बिन्दुस्राव
1 इसमें जल, जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। इसमें कोशारस तरल रूप में बाहर निकलता है।
2 वाष्पोत्सर्जित जल शुद्ध होता है। कोशारस में जल, शर्करा, अमीनों अम्ल लवण आदि होते हैं।
3 वाष्पोत्सर्जन की क्रिया रन्ध्र, बाह्यत्वचा तथा उपचर्म (cuticle) द्वारा होती है। बिन्दुस्राव जलरन्ध्रों (hyda- thodes) द्वारा होता है।

 

4 रन्ध्र आवश्यकतानुसार खुलते और बन्द होते हैं। जलरन्ध्र सदैव खुले रहते हैं।
5 यह क्रिया प्रायः दिन में होती है। यह क्रिया प्रातः या रात्रि में होती है।
6 वाष्पोत्सर्जन पर मूलदाब का कोई विशेष प्रभाव नहीं होता है। यह क्रिया मूलदाब के कारण होती है।

 

 प्रश्न 16. रसांकुर क्या हैं? ये कहाँ पाये जाते हैं तथा इनका क्या कार्य है?

उत्तर-  रसांकुर (villi) छोटी आंत की श्लेष्मिका में पाये जाने वाले उभार होते हैं। छोटी आँत (क्षुद्रान्त्र) का अवशोषण तल रसांकुर तथा सूक्ष्मांकुरों के कारण लगभग 600 गुना हो जाता है। रसांकुरों तथा सूक्ष्मांकुरों में रक्त केशिकाओं तथा लसीका केशिकाओं का जाल पाया जाता है। वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल का अवशोषण लसीक केशिकाओं द्वारा तथा अन्य सभी पचे हुए हुए पोषक पदार्थों का अवशोषण रक्त केशिकाओं द्वारा सक्रिय विसरण की सहायता से होता है। इस क्रिया में ऊर्जा व्यय होती है, यह ऊर्जा ATP से प्राप्त होती है।

प्रश्न 17. वाष्पोत्सर्जन को परिभाषित कीजिए। यह कितने प्रकार का होता है?

उत्तर- वाष्योत्सर्जन (Transpiration)- पौधे के वायवीय भागों से होने वाली जलहानि को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। जल पौधे से जलवाष्प के रूप में विसरित होता है।

वाष्पोत्सर्जन के प्रकार- यह निम्नलिखित तीन प्रकार से होता है-

(a) रन्ध्रीय वाष्पोत्सर्जन- पत्तियों तथा पौधे के कोमल वायवीय भागों पर स्थित रन्ध्रों से लगभग 90% जलहानि होती है।

(b) उपत्वचीय वाष्पोत्सर्जन लगभग 3-9% जलहानि पत्तियों और तने की बाह्य त्वचा से होती है।

(c) वातरन्ध्रीय वाष्पोत्सर्जन– काष्ठीय पौधों में लगभग 1% जलहानि वातरन्ध्रों से होती है।

प्रश्न 18. पाचन तथा पोषण में अन्तर बताइए।

उत्तर- जटिल अघुलनशील भोज्य पदार्थ को ग्रहण करने के पश्चात् उन्हें सरल घुलनशील इकाई में बदलने की क्रिया पाचन कहलाती है तथा भोज्य पदार्थों को ग्रहण करके उन्हें शरीर की कोशिकाओं में प्रयुक्त होने योग्य बनाने की सम्पूर्ण प्रक्रिया पोषण कहलाती है।

प्रश्न 19. लसिका परिवहन के कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- लसिका परिवहन (Lymphatic Circulation)- लसिका कैशिकायें, लसिका वाहिनियाँ, लसिका गाउँ तथा लसिका अंग मिलकर लसिका तन्ना बनाते हैं। लसिका (lymph) वास्तव में छना हुआ रक्त होता है। इसमें प्लाज्मा तथा श्वेत रुधिराणु पाये जाते हैं। इसमें अघुलनशील प्रोटीन, उत्सर्जी पदार्थ अधिक मात्रा में होते हैं। लसिका तन्त्र द्वारा ऊतक तरल वापस रक्त में पहुँचता रहता है। लसिका केशिकायें आंत्र से वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल का अवशोषण करके वसा बिन्दुओं के रूप में रक्त परिसंचरण तन्त्र में पहुँचाती हैं।

प्रश्न 20. पाचक रस पर टिप्पणी लिखिए।

अथवा  पित्त रस क्या है? यह कहाँ बनता है? इसके कार्य का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- पाचक रस- आहारनाल तथा सम्बन्धित ग्रन्थियों से निम्न पाचक रस स्रावित होकर भोजन में मिलते हैं-

  1. जठर रस- जठर अन्थि से जठर रस स्रावित होता है। जठर रस में निम्न एन्जाइम पाए जाते हैं-

(i) पेप्सिन (Pepsin)- यह प्रोटीन्स को पेप्टोन्स एवं प्रोटिओजेज में बदलता है।

(ii) जठर लाइपेज (Gastric Lipase)-  यह वसा की कुछ मात्रा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदलता है।

(iii) रेनिन (Renin)- यह दूधक की घुलनशील प्रोटीन को अघुलनशील अवस्था में बदलकर दूध को दही में बदल देता है।

  1. पित्त रस- पित्त रस यकृत कोशिकाओं से स्रावित होता है। यह एक क्षारीय तरल है। पित्त आमाशय से आयी लुगदी को क्षारीय बनाता है तथा लुगदी को पतला करता है, इसे काइल (chyle) कहते हैं। पित्त रस वसा का इमल्सीकरण करके उसके पाचन को सुगम बनाता है। यह हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा भोजन को सड़ने से बचाता है। आहारनाल में क्रमाकुंचन गतियों को भी प्रेरित करता है।
  2. अग्न्याशय रस अग्न्याशयी रस में निम्न एन्जाइम पाये जाते हैं.

(i) एमाइलेज (Amylase)- यह मण्ड को शर्करा में बदलता है।

(ii) लाइपेज (Lipase)-  यह लगभग 80% वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देता है।

(iii) ट्रिप्सिन एवं काइमोट्रिप्सिन (Trypsin and Chymo- trypsin) – ये प्रोटीन्स को पॉलीपेप्टाइड्स में बदलते हैं।

  1. आन्त्रीय रस- यह अवशेष वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदलता है।

प्रश्न 21. पोषण क्या है? पोषण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

उत्तर शरीर को जीवित दशा में बनाये रखने के लिए कोशिका में निरन्तर उपापचय होता रहता है। उपापचय के लिए भोजन या कच्चा माल जीवधारी बातावरण में लेते रहते हैं। इसे पोषण कहते हैं। ऊर्जा सत्यायन, भरम्मत तथा वृद्धि के लिए पोषण की आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 23. रक्त (रुधिर) तथा लसिका में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-                                                                   रक्त और लसिका में अन्तर

रक्त

लसिका

1. लाल रुधिराणु (RBCs) पाये जाते हैं।

2. श्वेत रुचिराणु कम होते हैं। न्यूट्रो फिल्स अधिक संख्या में होते हैं।

3. घुलनशील प्रोटीन्स अधिक तथा अघुलनशील प्रोटीन्स कम मात्रा में होती है।

4. O2  और पोषक पदार्थ अधिक तथा उत्सर्जी पदार्थ की मात्रा सामान्य होती है।

1. लाल रुधिराणु अनुपस्थित होते हैं।

2. श्वेत रुधिराणु अधिक होते हैं। लिम्फोसाइट्स सबसे अधिक होते हैं।

3. घुलनशील प्रोटीन्स कम तथा अघुलनशील प्रोटीन्स अधिक होती.

4. O2 और पोषक पदार्थ कम तथा उत्सर्जी पदार्थ की मात्रा अधिक होती है।

 प्रश्न 24. धमनी तथा शिरा में अन्तर बताइए।

अथवा  धमनी और शिरा में अन्तर बताइए। पल्मोनरी शिरा में किस प्रकार का रक्त बहता है?

उत्तर-                                                                     धमनी तथा शिरा में अन्तर

धमनियाँ (Arteries)

शिराएँ (Veins)

1. ये रक्त को हृदय से अंगों तक लाती हैं।

2. इनमें शुद्ध रक्त बहता है (फुफ्फुस धमनी में अशुद्ध रक्त बहता है।

3. धमनी गुलाबी या चटक लाल रंग की होती है।

4. धमनियों की भित्ति मोटी होती है।

5. इनकी गुहा संकरी होती है।

6. धमनियों में रक्त अत्यधिक दबाव के साथ रुक-रुककर बहता है।

7. इनमें कपाट नहीं होते हैं।

1. ये रक्त को अंगों से हृदय में लाती हैं।

2. इनमें अशुद्ध रक्त बहता है (फुफ्फुस शिरा में शुद्ध रक्त बहता है।

3. शिराये गहरी लाल या नीले रंग की होती है।

4. शिराओं की भित्ती अपेक्षा- कृत पतली होती है।

5. इनकी गुहा चौड़ी होती है।

6. शिराओं में रक्त धीमी गति से. निरन्तर तथा कम दबाव के साथ बहता है।

7. इनमें कपाट पाये जाते हैं।

 प्रश्न 25. श्वासोच्छवास तथा श्वसन में अन्तर लिखिए।

उत्तर-                                                                श्वासोच्छ्वास तथा श्वसन में अन्तर

श्वासोच्छ्वास (Breathing)

श्वसन (Respiration)

1. निश्वसन में वातावरण से वायु श्वसन अंगों तक पहुंचती है।

2. नि: श्वसन तथा उच्छवसन में श्वसन अंगों से CO2 का जलवाष्प युक्त वायु वातावरण में वापस चली जाती है

3. यह क्रिया फेफड़ों या अन्य श्वसन अंगों द्वारा होती है।

1. यह एक अपचयी क्रिया है। इसमें कार्बनिक भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है।

2. ऑक्सीकरण के फलस्वरूप CO2  तथा जलवाष्प बनती है और ऊर्जा मुक्त होती है।

3. यह क्रिया जीवित कोशिका में होती है।

 प्रश्न 26. ऑक्सी तथा अनॉक्सी श्वसन में अन्तर लिखिए।

उत्तर-                                                       ऑक्सी श्वसन तथा अनॉक्सी श्वसन में अन्तर

ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration)

अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic Respiration)

1. इस क्रिया में O, की आवश्यकता होती है। 1. इसमें 0, की आवश्यकता नहीं होती है।
2. इस क्रिया में ग्लूकोस के पूर्ण ऑक्सीकरण से 673 kcal ऊर्जा मुक्त होती है। 2. इस क्रिया में ग्लूकोज के आंशिक ऑक्सीकरण से 21 kcal ऊर्जा मुक्त होती है।
3. इस क्रिया में 38 ATP बनते हैं।

 

3. इस क्रिया में 2 ATP बनते हैं।
4. CO2 अधिक मात्रा में निकलती है। 4. CO2  कम मात्रा में निकलती है।
5. क्रिया के अन्त में CO, तथा जल बनता है।

2 C6H12 O6→ 6O₂ + 6CO2+6H2 O+ 38 ATP

5. क्रिया के अन्त में C₂H₂OH तथा CO2  बनती है।

2 C6H12 O6→ 2C2H5OH + 2CO2  + 2 ATP

प्रश्न 27. खुले तथा बन्द रक्त परिसंचरण तन्त्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर- रक्त परिसंचरण दो प्रकार का होता है-

  1. खुला रक्त परिसंचरण तन्त्र, तथा 2. बन्द रक्त परिसंचरण तन्त्र।
  2. खुला रक्त परिसंचरण तन्त्र (Open Blood Circulatory System)- इसमें रक्त वाहिनियों का मुख्यतया अभाव होता है। रक्त (हीमोलिम्फ) देहगुहा (हीमोसील – haemocoel) में भरा रहता है। हीमोसील पृष्ठ तथा अधर डायफ्राम द्वारा पात्रों (sinuses) में बँट जाती है। आन्तरांग (internal organs) हीमोलिम्फ में पड़े रहते हैं अर्थात् सीधे रक्त के सम्पर्क में रहते हैं। हीमोलिम्फ (रक्त) में हीमोग्लोबिन का अभाव होता है, जैसे- कॉकरोच, टिड्डा, झींगा, केकड़ा आदि।
  3. बन्द रक्त परिसंचरण तन्त्र (Closed Blood Circula- tory System)- इसमें ‘रक्त’ वाहिनियों (धमनी → धमनिकायें → धमनी केशिकायें → शिरा केशिकायें → शिराकायें → शिरा) से होकर बहता है। पदार्थों का आदान-प्रदान रक्त केशिकाओं द्वारा होता है। रक्त में हीमोग्लोबिन पाया जाता है, जैसे-केंचुआ, मछली, मेंढक, छिपकली, कबूतर, मनुष्य आदि।

UP Board and NCERT Solution of Class 10 Science Chapter- 5 Life Processes ( जैव प्रक्रम ) MCQ

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